कुम्भ 2019, प्रयागराज

कुम्भ भारतीय संस्कृति का महापर्व कहा गया है। कुम्भ का शाब्दिक अर्थ है “कलश”, कुम्भ का नाम कुम्भ दानवों के ऊपर रखा गया जिसने अमृत पान करने के लिए देवताओं से युद्ध किया था। कुम्भ का आयोजन १२ वर्षों में भारत के ४ प्रमुख स्थानों पर आयोजित किया जाता है, जिनमें प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नाशिक सम्मिलित है। समुंद्र मंथन में अमृत कलश प्राप्त हुआ, अमृत पान करने के लिए देवता और असुरों के मध्य युद्ध छिड़ने के बाद देवताओं को भगवान विष्णु ने अमृत पान करने का मार्ग बताया।

समुद्र मंथन के लिए पर्वतराज भद्राजल को लिया और समुद्र मंथन के पश्चात निकले अमृत को लेकर जब देवता भागे तो असुर ने भी उनका पीछा किया तो छीना-झप्टी में जिन ४ जगह अमृत की बूँदें गिरी आज वहीं कुम्भ का आयोजन होता है। यह एक ऐसा धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व है, जो पूरी दुनिया पर एक छाप छोड़ता है।

कुम्भ भारतीय संस्कृति की अप्रतिम धरोहर है। यहाँ जो भी श्रद्धालु आते हैं उसके मन में मोक्ष प्राप्ति और सेवा भाव रहता है। इस पर्व पर स्नान, दान ,ज्ञान की बात कही जाती है। कुम्भ का वर्णन विश्व के अनेक देशों में है। कुम्भ की तैयारी कुछ डेढ़ साल पहले से शुरू हो जाती है। सभी अधिकारियों को अपनी अपनी ज़िम्मेदारियों से अवगत करा दिया जाता है और सभी अपनी ज़िम्मेदारी के अनुसार अपने काम में लग जाते हैं।

बाहरी पर्यटकों को जो सबसे ज़्यादा अचंभित करती है वो है कुम्भ में श्रद्धालुओं की भीड़, लोगों में श्रद्धा कुछ इस प्रकार है की महिलाएँ सुबह के ३ बजे उठकर संगम में डुबकी लगाती हैं और पूछे जाने पर जवाब सिर्फ़ इतना होता है की ये सब तो ईश्वर की महिमा है। सन १९२३ में एक अंग्रेज़ ने श्री मदन मोहन मालवीय से पूछा था कि आप किस प्रकार इतने सारे श्रद्धालुओं को निमंत्रण देते हैं तो उसमें श्री मदन मोहन मालवीय ने जवाब दिया की हम कोई निमंत्रण नहीं देते बस एक पंचांग छपता है, जिसमें कुम्भ की तारीख़ होती है। तारीख़ अनुसार सारा हिन्दु समाज संगम में इकट्ठा हो जाता है। इनकी मान्यता है की संगम में पश्चाताप का भाव लिए जो भी यहाँ आता है और स्नान करता है, उसके सारे पाप माँ गंगा ख़ुद में समा लेती है, और वो भक्त अपने सारे पाप से मुक्त हो जाता है। इसी तरह प्रयागरज कुम्भ २०१९ में स्नान के मुहूर्त निकाले गए हैं :

१ मकर्सक्रांति स्नान १५ जनवरी २०१९

२ पूस पूर्णिमा स्नान २१ जनवरी २०१९

३ मौनी अमावस्या स्नान ४ फ़रवरी २०१९

४ बसंतपंचमी स्नान १० फ़रवरी २०१९

५ माँगी पूर्णिमा स्नान १९ फ़रवरी २०१९

६ महा शिवरात्रि स्नान ४ मार्च २०१९

इस बार कुम्भ १५ जनवरी से लेकर ४ मार्च तक रहेगा। इस बार कुम्भ में १४ मुख्य अखाड़े हैं जिन में से इस बार एक नया अखाड़ा जुदा है -किन्नर अखाड़ा, किन्नरों ने इस बार अपना भव्य प्रदर्शन किया जिसमें भारी मात्रा में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया , और आशीर्वाद लिया। किन्नरों को सम्मान देना एक नयी पहल है जो कि हमारे भारत को और बेहतर बनाने में मदद करेगा। कुम्भ में अनेक राज्यों से, जाती से,धर्म से श्रद्धालु यहाँ पर आते हैं। यहाँ किसी से भी कोई भेद भाव नहीं किया जाता है। जहाँ एक तरफ़ भारत की एकता अखंडता तो तहस नहस करने के नारे लगाए जाते हैं वहीं कुम्भ में ना जाति देखी जाती है ना धर्म सब एक साथ संगम में डुबकी मारने बहुत दूर दूर से आते हैं।

यहाँ पंडालों में सुबह से ले कर शाम ६:३० तक कथा , यज्ञ और अध्यात्म और शाम के ६:३० के बाद सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ होती हैं।२९ राज्यों के साथ साथ सेवन सिस्टर्ज़ भी आयी हैं। इस बार कुम्भ में २४ घंटे निशुल्क भंडारे लगाए जाते हैं। श्रद्धालु बड़े चाव से प्रसाद को ग्रहण करते हैं। भारत के अलावा शायद ही कोई ऐसा देश होगा जो करोड़ों को निशुल्क बिना किसी स्वार्थ के खाना खिलाएँ।

इस बार कुम्भ में युवाओं की संख्या बढ़ी है जो कि साबित करती हैं की देश में अभी भी संस्कृति को जानने की जिज्ञासा और इच्छा है। जिससे कि हम कह सकते हैं की कुम्भ अनादी काल से चलता आ रहा है और आगे भी चलता रहेगा। हमारी भारतीय संस्कृति अमर रहेगी।

कुंभ हमारी संस्कृति को आगे बचा कर रखने का एक जरिया है। युवा जो हमारी संस्कृति और सभ्यता को नहीं जानते या विमुख है, उनके लिए कुंभ संस्कृति को जानने के लिए एक अच्छा माध्यम है। एक लड़की से पूछा गया कि क्या आप गीता के बारे में जानती है? उनका उत्तर सुन कर आश्चर्य होता है कि भारत में ऐसे लोग है जिनको गीता के बारे में नहीं पता और वो भी एक युवा को। दुःख की बात है कि एक लड़की जो आगे एक परिवार को खड़ी करेगी वो अपने परिवार में गीता का अकूत ग्यान को आगे नहीं दे पाएगी। लेकिन खुशी की बात है कि कुंभ के वजह से उसे गीता की जानकारी हो पाई।

भारत में नदियों को माता का दर्जा दिया गया है। कुंभ में जब लोग पूजा करने आता है तो मातृ भाव से पूजा अर्चना करते है। कुंभ का एक पक्ष ये भी है।

नाम- ऋचा उमराव

आर्यन सिंह राजपूत

आनंद ठाकुर

आशीश सिंह

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